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क्रमांक |
वर्तमान
समस्या |
सुझाया
गया समाधान (सरकारी नीति) |
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1 |
लेखाजोखा में पारदर्शिता की कमी |
डिजिटल
प्लेटफ़ॉर्म पर पूरा डेटा सार्वजनिक + स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य |
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2 |
राजनीतिक
हस्तक्षेप |
समिति
चुनाव पूरी तरह लोकतांत्रिक, राजनीतिक दलों की दखलंदाज़ी पर रोक |
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3 |
प्रबंधन
में दक्षता की कमी |
पदाधिकारियों
व कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण कार्यक्रम |
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4 |
कागज़ी कार्यवाही अधिक, तकनीक का अभाव |
सभी
सेवाएँ ऑनलाइन (ऋण, लाभांश,
मतदान,
विपणन आदि) |
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5 |
परंपरागत
ढाँचा, आधुनिकता
का अभाव |
कृषि,
डेयरी,
हस्तकला आदि
में आधुनिक तकनीक व प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना |
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6 |
वित्तीय
संसाधनों की कमी |
सहकारी
बैंकों को सशक्त बनाना, पूँजी निवेश की सुविधा और ऋण वसूली पर सख्ती |
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7 |
सदस्य
भागीदारी कम |
नियमित
बैठकों को अनिवार्य करना और सक्रिय सदस्यों को प्रोत्साहन |
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8 |
सरकारी
मदद बीच में अटक जाती है |
DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधा लाभ सदस्य तक
पहुँचाना |
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9 |
प्रदर्शन का मूल्यांकन नहीं
होता |
हर
समिति का वार्षिक मूल्यांकन + सफल को पुरस्कार, असफल का पुनर्गठन |
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10 |
जनता
में जागरूकता व विश्वास की कमी |
अमूल,
इफको जैसे सफल
मॉडलों का प्रचार और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान |
8 सरकारी मदद बीच में अटक जाती है DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधा लाभ सदस्य तक पहुँचाना
9 प्रदर्शन का मूल्यांकन नहीं होता हर समिति का वार्षिक मूल्यांकन + सफल को पुरस्कार, असफल का पुनर्गठन
10 जनता में जागरूकता व विश्वास की कमी अमूल, इफको जैसे सफल मॉडलों का प्रचार और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान
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क्रमांक |
वर्तमान
समस्या |
सुझाया
गया समाधान (सरकारी नीति) |
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1 |
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